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समस्तीपुर भर्ती परीक्षा में हड़कंप: AI जांच में गड़बड़ी का शक, निकला जुड़वां भाइयों का मामला

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समस्तीपुर भर्ती परीक्षा के दौरान फर्जीवाड़े का शक हुआ, लेकिन जांच में मामला जुड़वां भाइयों का निकला। AI सिस्टम भी पहचान में भ्रमित हो गया।

समस्तीपुर/आलम की खबर: बिहार में चल रही मद्यनिषेध सिपाही, कक्षपाल एवं चलंत दस्ता सिपाही भर्ती परीक्षा के दौरान समस्तीपुर जिले के एक परीक्षा केंद्र पर बुधवार को अचानक उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई जब एक परीक्षार्थी को लेकर फर्जीवाड़े की आशंका जताई गई। मामला शहर के गोल्फ फील्ड रेलवे कॉलोनी स्थित उच्च माध्यमिक विद्यालय परीक्षा केंद्र का है, जहां संदिग्ध सूचना मिलने के बाद पुलिस और प्रशासन की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और जांच शुरू की गई।

सूचना में कहा गया था कि एक परीक्षार्थी अपने एडमिट कार्ड में छेड़छाड़ कर किसी अन्य अभ्यर्थी के स्थान पर परीक्षा दे रहा है। इस गंभीर आरोप के बाद सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त कर दिया गया और संबंधित परीक्षार्थी को तुरंत जांच के दायरे में लिया गया। प्रारंभिक स्तर पर पहचान सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की गई, जिसमें एआई आधारित सिस्टम का भी उपयोग किया गया।

जांच के दौरान एआई सिस्टम ने तस्वीर, जन्मतिथि और पिता के नाम के आधार पर मिलान करते हुए कुछ समानताएं दर्शाईं, जिससे जांच टीम को शुरुआती स्तर पर संदेह हुआ। इसी कारण परीक्षार्थी की पहचान को लेकर कई घंटों तक विस्तृत पूछताछ और दस्तावेजों की जांच चलती रही।

हालांकि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, मामला एक बिल्कुल अलग और दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया। सभी दस्तावेजों और तथ्यों के गहन सत्यापन के बाद यह स्पष्ट हुआ कि यह कोई फर्जीवाड़े का मामला नहीं था, बल्कि जुड़वां भाइयों की समानता का परिणाम था। जांच में सामने आया कि संबंधित परीक्षार्थी का जुड़वां भाई उसी दिन बेगूसराय जिले में परीक्षा दे रहा था।

दोनों भाइयों की शक्ल-सूरत, फोटो और व्यक्तिगत विवरण काफी हद तक समान होने के कारण एआई आधारित पहचान प्रणाली भी स्पष्ट अंतर नहीं कर सकी और प्रारंभिक स्तर पर भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई। इसी वजह से जांच एजेंसियों को भी कुछ समय के लिए शक बना रहा।

बाद में सभी आवश्यक दस्तावेजों की पुष्टि और गहन जांच के बाद पुलिस ने संबंधित परीक्षार्थी को पूरी तरह क्लीन चिट दे दी और उसे परीक्षा प्रक्रिया में आगे शामिल होने की अनुमति दी गई। इसके बाद परीक्षा केंद्र पर मौजूद अधिकारियों और सुरक्षा कर्मियों ने राहत की सांस ली।

इस परीक्षार्थी की पहचान कटिहार जिले के रहने वाले अनिरुद्ध मंडल के पुत्र विजय मंडल के रूप में की गई है। प्रारंभिक भ्रम दूर होने के बाद यह मामला पूरी तरह साफ हो गया और परीक्षा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराई गई।

सदर एसडीपीओ-1 संजय कुमार पांडेय ने बताया कि परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए हर संदिग्ध सूचना को गंभीरता से लिया जाता है। उन्होंने कहा कि इस मामले में भी सभी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए जांच की गई और अंत में किसी भी प्रकार की अनियमितता नहीं पाई गई।

यह घटना इस बात को भी दर्शाती है कि आधुनिक एआई आधारित सत्यापन प्रणाली काफी प्रभावी है, लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों जैसे जुड़वां व्यक्तियों के मामलों में मानवीय सत्यापन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

स्थानीय स्तर पर यह मामला कुछ समय के लिए चर्चा का विषय जरूर बना, लेकिन अंततः स्थिति स्पष्ट होने के बाद सभी ने राहत महसूस की। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए सत्यापन प्रक्रिया को और मजबूत किया जाएगा।

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